Kabhi To Khul Ke Baras

Album cover art for "Kabhi To Khul Ke Baras" by Chitra Singh

Chitra Singh - Pop, India

Kabhi To Khul Ke Baras

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Duration: 5:14

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Lyrics

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[Intro] कभी तो खुल के बरस अब्रे-ऐ-मेहेरबान की तरह कभी तो खुल के बरस अब्रे-ऐ-मेहेरबान की तरह [Chorus] मेरा वज़ूद है जलते हुए मकान की तरह कभी तो खुल के बरस अब्रे-ऐ-मेहेरबान की तरह [Verse 1] मैं एक ख्वाब सही आपकी अमानत हू मैं एक ख्वाब सही आपकी अमानत हू मुझे संभाल के रखिएगा जिस्म-ओ-जान की तरह [Chorus] मेरा वज़ूद है जलते हुए मकान की तरह कभी तो खुल के बरस अब्रे-ऐ-मेहेरबान की तरह [Verse 2] कभी तो सोच के वो शख्स किस कदर था बुलंद कभी तो सोच के वो शख्स किस कदर था बुलंद जो बिच्छ गया तेरे कदमो मे आसमान की तरह [Chorus] मेरा वज़ूद है जलते हुए मकान की तरह कभी तो खुल के बरस अब्रे-ऐ-मेहेरबान की तरह [Verse ] बुला रहा है मुझे फिर किसी बदन का बसंत बुला रहा है मुझे फिर किसी बदन का बसंत गुज़र ना जाए ये रुत भी कही खिज़ां की तरह [Chorus] मेरा वज़ूद है जलते हुए मकान की तरह कभी तो खुल के बरस अब के मेहेरबान की तरह

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Credits

Writers
  • Prem Warbartoni