Shauq

Album cover art for "Shauq" by Shahid Mallya

Shahid Mallya - Pop, India

Shauq

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Duration: 4:16

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Lyrics

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[Chorus: Swanand Kirkire] बिखरने का मुझको शौक़ है बड़ा समेटेगा मुझको तू बता ज़रा हाय, बिखरने का मुझको शौक़ है बड़ा समेटेगा मुझको तू बता ज़रा [Verse 1: Sireesha Bhagavatula & Shahid Mallya] डूबती है तुझमें आज मेरी कश्ती गुफ़्तगू में उतरी बात हो, डूबती है तुझमें आज मेरी कश्ती गुफ़्तगू में उतरी बात की तरह [Verse 2: Shahid Mallya] हो, देख के तुझे ही रात की हवा ने साँस थाम ली है हाथ की तरह हाय, कि आँखों में तेरी रात की नदी ये बाज़ी तो हारी है १०० फ़ीसदी [Instrumental-break] [Verse 3: Shahid Mallya] हो, उठ गए क़दम तो आँख झुक रही है जैसे कोई गहरी बात हो यहाँ हो, खो रहे हैं दोनों एक-दूसरे में जैसे सर्दियों की शाम में धुआँ [Chorus: Shahid Mallya] हाय, ये पानी भी तेरा आईना हुआ सितारों में तुझको है गिना हुआ बिखरने का मुझको शौक़ है बड़ा समेटेगा मुझको तू बता ज़रा, ज़रा

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Credits

Writers
  • Varun Grover