Kai Baar Yun Bhi Dekha Hai

Mukesh - Pop, Indian Classical
Kai Baar Yun Bhi Dekha Hai
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Duration: 3:22
Lyrics
[Chorus] कई बार यूँ भी देखा है ये जो मन की सीमा रेखा है, मन तोड़ने लगता है अंजानी प्यास के पीछे अंजानी आस के पीछे मन दौड़ने लगता है [Verse 1] राहों में, राहों में, जीवन की राहों में जो खिले हैं फूल-फूल मुस्कुरा के कौन सा फूल चुरा के रख लूँ मन में सजा के? [Chorus] कई बार यूँ भी देखा है ये जो मन की सीमा रेखा है, मन तोड़ने लगता है अंजानी प्यास के पीछे अंजानी आस के पीछे मन दौड़ने लगता है [Verse 2] जानूँ ना, जानूँ ना, उलझन ये जानूँ ना सुलझाऊँ कैसे? कुछ समझ ना पाऊँ किसको मीत बनाऊँ? किसकी प्रीत भुलाऊँ? [Chorus] कई बार यूँ भी देखा है ये जो मन की सीमा रेखा है, मन तोड़ने लगता है अंजानी प्यास के पीछे अंजानी आस के पीछे मन दौड़ने लगता है
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Credits
- Writers
- Yogesh