Kaali Raatein

Lyrics
[Abhinav Shekhar & Pratiksha Vashishtha "Kaali Raatein" के बोल] [Verse: Abhinav Shekhar] ढूंढ़ता रहा मैं सच से क्या है मेरा वास्ता सही गलत के बीच में भटक गया मैं रास्ता ज़िंदगी की कैद में फंसा तो जान पाया मैं सच से बड़ा न झूठ कोई, बोलते हैं सब यहां [Pre-Chorus: Pratiksha Vashishtha & Abhinav Shekhar] है बुरा, ज़माना हो रखा है बुरा ना रहा, भरोसा अब किसी पे ना रहा लग रहा, अकेलेपन से डर है लग रहा जा रहा, सवेरा दूर मुझसे जा रहा [Chorus: Abhinav Shekhar & Pratiksha Vashishtha] काली हैं, रातें ये काली हैं काली हैं, रातें ये काली हैं जाली है, दुनिया ये जाली है काली हैं, रातें ये काली हैं [Bridge: Abhinav Shekhar] गहरी ख़ामोशी में सच की दीवारें हैं परदे फ़रेबी हैं झूठी दरारें हैं [Verse: Abhinav Shekhar] ढूंढ़ता रहा मैं सच से क्या है मेरा वास्ता सही गलत के बीच में भटक गया मैं रास्ता ज़िंदगी की कैद में फंसा तो जान पाया मैं सच से बड़ा न झूठ कोई, बोलते हैं सब यहां [Chorus: Abhinav Shekhar & Pratiksha Vashishtha] काली हैं, रातें ये काली हैं काली हैं, रातें ये काली हैं जाली है, दुनिया ये जाली है काली हैं, रातें ये काली हैं [Outro: Abhinav Shekhar & Pratiksha Vashishtha] काली हैं, रातें ये काली हैं काली हैं, रातें ये काली हैं
Rate this song
0/5.0 - 0 Ratings
Loading comments...
Credits
- Writers
- Abhinav Shekhar